
नई जगह घूमने की बात हो तो सच कहें—खाना सफ़र को और खास बना देता है।
तबुक उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब में स्थित है और अपने पुरातात्विक स्थलों तथा पैगंबर मूसा की कहानी से जुड़े होने के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन यहाँ और भी बहुत कुछ है!
अगर आप तबुक के आकर्षण को जानने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक स्वादिष्ट सरप्राइज़ है। तबुक का खाना स्वाद और परंपरा का मनमोहक संगम है। सर्दियों के मौसम के लिए उपयुक्त गर्म, भरपेट भोजन से लेकर सर्दियों के मौसममें लाल सागर के ताज़ा समुद्री भोजन तक, हर पसंद के लिए कुछ न कुछ है।
यह गाइड आपको स्वादों की एक रोमांचक यात्रा पर ले जाएगी, चाहे आप बस घूमने आए हों या कुछ प्रामाणिक चखना चाहते हों!

फ़त्तेह
तबुक के प्रामाणिक पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने की बात हो तो फ़त्तेह को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसे बनाने की शुरुआत साधारण आटे को गूँथकर अंगारों पर गर्म करने से होती है। इससे ब्रेड में मिट्टी-सी धुँआदार खुशबू और स्वाद आ जाता है। तैयार होने पर उसकी राख साफ़ की जाती है, उसे हाथ से मसलकर ताज़े दूध और भरपूर जंगली घी के साथ मिलाया जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद तैयार पकवान गर्म, भरपेट और स्वादिष्ट होता है, जो खासकर ठंडे महीनों में बहुत अच्छा लगता है। प्रामाणिक फ़त्तेह चखने के लिए सीधे "अल ग़ुवैरी हेरिटेज किचन" या "ऐन सक्कुर रेस्टोरेंट" जाएँ; दोनों लोकप्रिय तबुक के रेस्तराँहैं जहाँ यह पारंपरिक, भरपेट पकवान तैयार किया जाता है।

अल-मुजल्लाला और अल-खुमैया
अगर आप तबुक में हैं और कुछ आरामदेह तथा गर्म खाना चाहते हैं, तो अल-मुजल्लाला और अल-खुमैया ज़रूर चखें—ये सचमुच पारंपरिक पसंदीदा व्यंजन हैं। दोनों को बनाने की शुरुआत एक ही तरह से होती है: पहले आटे को तला जाता है, फिर उसे चपटी गोल टिकिया का आकार देकर टुकड़ों में काटा जाता है और दूध के साथ मिलाया जाता है। खास बात यह है कि घी डालने पर इसे "अल-मुजल्लाला" और दूध मुख्य सामग्री होने पर "अल-खुमैया" कहा जाता है।

जरीश
रमज़ान के पवित्र महीने में तबुक के पसंदीदा व्यंजनों में से एक जरीश है। यह भरपेट और संतोष देने वाला भोजन है, जो परिवारों को खाने के समय एक साथ लाता है। इसे गेहूँ के दानों को हाथ से पीसकर, फिर शोरबे या पानी में धीमी आँच पर पकाकर बनाया जाता है। मिश्रण को "अल-मिस्वात" नाम के लकड़ी के चम्मच से लगातार चलाया जाता है, जब तक कि वह गाढ़ा न हो जाए। अधिक भरपूर स्वाद के लिए कुछ लोग इसे दूध के साथ धीमी आँच पर पकाते हैं और ऊपर से थोड़ा मक्खन या जंगली घी डालते हैं।

सायादिया
समुद्री भोजन के शौकीनों के लिए सयादिया एक लाजवाब पकवान है, जिसमें पारंपरिक चावल और मछली का मेल होता है। चावल को तले हुए प्याज़ और “बह़ारात” से बने गाढ़े शोरबे में पकाया जाता है। बह़ारात जीरा, ऑलस्पाइस, धनिया, इलायची, मिर्च और अन्य मसालों का गर्म तासीर वाला मिश्रण है। आमतौर पर रेड स्नैपर या सी बास जैसी सफ़ेद मछली का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे सुनहरा होने तक बेक या फ्राई किया जाता है। सभी चीज़ें एक बड़ी थाली में परोसी जाती हैं और ऊपर से चीड़ के बीज तथा भुने हुए बादाम डाले जाते हैं। स्वाद को और बढ़ाने के लिए इसे अक्सर साथ परोसे जाने वाले खट्टे सॉस के साथ खाएँ। बेहतरीन अनुभव के लिए इसे “समाकियात ताबुक” या “जैंडोफ्लाई सीफ़ूड” में आज़माएँ।

मंसफ़
मंसफ़ सिर्फ़ एक भोजन नहीं है; यह जॉर्डन की गहरी जड़ें रखने वाली परंपरा है, जिसकी शुरुआत सीरिया से हुई। इसे बनाने के लिए बकरी के मांस को “जमीद” (गाढ़े, सुखाए हुए दही) में धीमी आँच पर पकाया जाता है और भुने हुए मेवों के साथ चपटी रोटी तथा चावल पर परोसा जाता है। इसे आमतौर पर मेहमानों के सम्मान में या उत्सवों के दौरान परोसा जाता है। इस्तेमाल किए जाने वाले मांस का प्रकार भी सम्मान दर्शाता है—बकरी का मांस सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। बड़ी दावतों में सबसे सम्मानित मेहमानों के लिए बीच में बकरी का सिर रखा जा सकता है।

सलीग
सऊदी अरब में सलीग एक पेट भरने वाला पकवान है, जो ठंड के दिनों में विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसे सफ़ेद चावल को मांस या चिकन और इलायची या मस्तकी जैसे मसालों के साथ उबालकर बनाया जाता है। चावल को तैयार शोरबे में तब तक पकाया जाता है जब तक वह नरम और मलाईदार न हो जाए। गर्म दूध धीरे-धीरे डालकर और मिश्रण को चलाते रहने से इसकी बनावट चिकनी, दलिया जैसी हो जाती है। इसी दौरान मांस या चिकन को अलग से स्वादिष्ट और सुनहरा होने तक पकाया जाता है। अंत में सब कुछ साथ परोसने पर मलाईदार चावल और ऊपर रखा नरम, भूरा मांस मिलकर गर्म, स्वादिष्ट और सुकून देने वाला भोजन बनाते हैं।

मरक़ूक़
मरक़ूक़ ताबुक का एक पारंपरिक पकवान है, जो सर्दियों में विशेष रूप से लोकप्रिय होता है। इसे आटा, नमक और पानी से बने नरम आटे को गूँथकर तैयार किया जाता है, फिर उसे कुछ देर आराम करने दिया जाता है। आटा आराम कर रहा हो, तब मांस को स्वादिष्ट शोरबे में आधा पकाया जाता है। इसके बाद आटे को पतला बेलकर धीरे से टुकड़ों में फाड़ा जाता है और सॉसपैन में डाल दिया जाता है, ताकि टुकड़े आपस में चिपकें नहीं। स्वाद और बनावट बढ़ाने के लिए अक्सर ज़ुकीनी या कद्दू जैसी सब्ज़ियाँ डाली जाती हैं। गर्म और संतोषजनक भोजन बनाने के लिए पूरे पकवान को तब तक धीमी आँच पर पकाया जाता है जब तक सब कुछ नरम और स्वादिष्ट न हो जाए।

मुसनक़रह
सऊदी अरब के ताबुक क्षेत्र का एक मशहूर पारंपरिक पकवान, मुसनक़रह मछली के शौकीनों में ख़ास तौर पर लोकप्रिय है। इसे आमतौर पर ग्रूपर (नाजेल) जैसी पूरी सफ़ेद मछली से बनाया जाता है और काली मिर्च, हल्दी तथा जीरे सहित स्वादिष्ट मसालों के मिश्रण से सजाया जाता है। मछली को प्याज़, टमाटर, शिमला मिर्च और कभी-कभी आलू जैसी ताज़ी सब्ज़ियों के साथ धीमी आँच पर पकाया जाता है। बेक की हुई या चूल्हे पर पकाई गई मछली नरम, स्वादिष्ट और भरपूर जायकेदार होती है। मुसनक़रह आमतौर पर रोटी या चावल के साथ परोसा जाता है और ऊपर से जड़ी-बूटियाँ तथा नींबू डाले जाते हैं।

मफ़रूकेह या जमरियाह
क्या आपने कभी सोचा है कि ताबुक के लोग कड़ाके की ठंड वाले सर्दियों के महीनों में खुद को गर्म कैसे रखते हैं? इसका एक स्वादिष्ट तरीका जमरियाह बनाना है, जिसे मफ़रूकेह भी कहते हैं। इस पारंपरिक पकवान को बनाने के लिए आटे और पानी को मिलाकर गोल लोई बनाई जाती है, जिसे गर्म अंगारों के नीचे दबाकर सुनहरा होने तक पकाया जाता है। तैयार होने पर इसे तोड़कर मीठे खजूर, भरपूर घी और शहद के साथ मिलाया जाता है। इसे हाथों से मसलकर मिलाने की प्रक्रिया के कारण इसका नाम “मफ़रूकेह” पड़ा।

बलीलाह
जो लोग अपने खान-पान पर ध्यान देते हैं, उन्हें बलीला ज़रूर चखना चाहिए। यह सऊदी अरब और मध्य पूर्व का एक लोकप्रिय और पौष्टिक व्यंजन है। यह स्वास्थ्यवर्धक स्नैक नरम, गर्म छोले में जैतून का तेल, नींबू का रस, जीरा और थोड़ा-सा नमक मिलाकर बनाया जाता है। कुछ व्यंजनों में अधिक स्वाद के लिए सुमाक, लहसुन, काली मिर्च या अजमोद जैसी ताज़ी जड़ी-बूटियाँ डाली जाती हैं, और इसे अक्सर कटे हुए चुकंदर या खीरे के साथ परोसा जाता है। इसे ज़्यादातर रमज़ान के दौरान इफ्तार में परोसा जाता है, लेकिन यह पार्टियों में स्टार्टर और पसंदीदा स्ट्रीट फ़ूड भी है।
